• Shubha Khadke

मरुस्थल में सृजन की गूंज


रुमा देवी

बाड़मेर से लगा थार का मरुस्थल, दूर दूर बसी ढाणियां , घरों में कशीदा करती महिलाऐं और पारम्परिक कला से सुढृढ़ होती आजीविका ये दृश्य आज से १०-१२ साल पहले नहीं था I पारम्परिक कशीदाकारी को फ़ैशन जगत में स्थापित करने का काफी बड़ा श्रेय ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर की अध्यक्ष श्रीमती रुमा देवी को जाता है I आज संस्था ७५ गाँवो में २०००० से अधिक महिलाओं के सघन नेटवर्क के साथ काम कर रही हैं I वे स्वयं इंडिया टुडे के २०१८ के वार्षिक अंक के मुखपृष्ठ की शोभा बढ़ा चुकी है I उन्होंने पारम्परिक पेचवर्क और कटवर्क को नया रूप देकर फ़ैशन इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है I




रुमा देवी कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी है, हाल ही में भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान किया साथ ही टेक्सटाइल फेयर्स इंडिया (TFI) द्वारा उन्हें “डिज़ाइनर ऑफ़ दी ईयर - 2019 अवार्ड से भी नवाजा गया I

बाड़मेर के एक छोटे से गांव से विदेशों तक में अपना रुतबा कायम करने का तक का ये सफर निश्चित ही चुनौती पूर्ण रहा है I इस सफर की शुरुआत २००६ में हुई , जब वे ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान से जुडी I महज १६ साल की उम्र में उनका विवाह एक साधारण परिवार में हुआ I आर्थिक समस्या के चलते उनको काम करना जरुरी था, वे सिर्फ कशीदा करना जानती थी और उन्होंने इसे ही अपनी आजीविका का मुख्य स्त्रोत बनाने का निश्चय किया I उस समय संस्थान महिलाओं को कशीदा करने का काम देता था I संस्थान से जुड़कर उन्होंने अपना पहला आर्डर निश्चित समय से कम समय में पूरा किया साथ ही अपने जैसी अन्य महिलाओं को भी समूह में जोड़ा I धीरे धीरे महिलाएँ जुड़ने लगी क्योकि काम की जरुरत सभी को थी I काम कम और करने वाले ज्यादा थे, ऐसे में नया काम लाना मुख्य चुनौती थी I


अभी तक पेचवर्क और कटवर्क चादरे, तकिये के कवर और टेबल पर बिछाने के कपडे तक ही सीमित था जो अक्सर एक दो बार ही ख़रीदा जाता है| रुमा देवी ने इसे पहनावे में लाने का विचार किया क्योकि पहने जाने वाले कपडे लोग हमेशा बदलते रहते है, यदि इसे फ़ैशन से जोड़े तो काम की संभावनाएं बढ़ेंगी, इस सोच की क्रांति ने अवसरों के द्वार खोले |

इस बीच वे संस्थान की अध्यक्ष बन चुकी थी I बाड़मेर के सुदूर इलाकों में प्रशिक्षण का काम जारी था I परन्तु फ़ैशन शो में पारम्परिक कशीदाकारी के पहनावे के साथ रेम्प पर उतरने को कोई मॉडल्स तैयार न थे ऐसे में सर्वप्रथम २०१५ में पारम्परिक कशीदाकारी के पहनावे के साथ स्वयं रुमा देवी रेम्प पर उतरी I पर्दाप्रथा मानने वाले एक छोटे से गांव की महिला राजस्थान हेरिटेज वीक में अपनी महिलाओं द्वारा की हुई कशीदाकारी के परिधान के साथ रेम्प पर उतरने का साहसिक निर्णय लेती हैं और यह निर्णय ही उनके लिए असीम संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करता है I इस फ़ैशन शो में देश के जाने माने डिज़ाइनर अब्राहम ठाकोर , अनीता डोंगरे , हेमंत त्रिवेदी ने रुमा देवी के कार्य की सराहना की और यही से पारम्परिक कला को फ़ैशन का साथ मिला I आधुनिक शैली के नवीन परिधानों और पारम्परिक कशीदा के जोड़ ने परंपरागत कला को पुनर्जीवित किया I इस फेशन शो के बाद रुमा देवी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा I आज देश और विदेश के बेहतरीन डिज़ाइनर के साथ वे काम कर रही है , उनकी टीम देश के कई स्थानों पर फेशन वीक में शामिल हो चुकी हैं , वे स्वयं लन्दन फेशन वीक में भागीदारी कर चुकी है I



कशीदा करती महिलाऐं

वर्त्तमान में उनके मार्गदर्शन में संस्थान महिलाओं को प्रशिक्षण देता है और फिर जॉब वर्क दिया जाता है I महिलाएं घर बैठकर काम करती है और निर्धारित समय में किये काम का मूल्य प्राप्त करती हैI मेहनताना उनके काम की बारीकी को ध्यान में रखकर दिया जाता है जो ४००० से १०००० रुपया महीना तक होता है I वर्त्तमान में संस्थान फेब इंडिया , ट्राइब इंडिया, नेशनल हैंडलूम ,आई टोकरी के साथ नियमित रूप से काम करता है।


ग्रामीण परिवेश की एक साधारण महिला आज अपने कौशल के दम पर कई महिलाओं को रोजगार प्रदान करने का असाधारण कार्य कर रही हैं I 150 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सीधे उनसे जुडी है I रुमा देवी के मार्गदर्शन में वे नई डिज़ाइन के परिधान बनाती हैं , ये संभव हो सका क्योकि रुमा देवी ने लीक से हटकर सोचा और उसे मूर्त रूप दिया I


रुमा देवी वास्तव में ग्रामीण भारत की आधुनिक तस्वीर को सशक्त रूप से पेश करती है , परम्परागत कलाओं को आधुनिकता के ऐसे ही जोड़ की दरकार है I

सुश्री शुभा  खड़के वर्त्तमान में इंस्टिट्यूट ऑफ़ रूरल मैनेजमेंट आणंद (IRMA)  के इनक्यूबेटर आईसीड  में इन्क्यूबेशन मैनेजर के पद पर कार्यरत है। वे पिछले लगभग १२  वर्षो से  ग्रामीण  विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही है।  उन्होंने कई संस्थाओं में जैसे आगा खान ग्राम समर्थन कार्यक्रम (भारत) , अरावली , बेसिक्स में कार्य किया है। ग्रामीण उद्यमिता और जमीनी स्तर  के उद्यमियों की क्षमता वर्धन में उनकी विशेष रूचि है। यह आलेख उनके द्वारा राष्ट्रीय उद्यमिता पुरुस्कार २०१९ के दौरान किये गए फील्ड विजिट के आधार पर लिखा गया है। आलेख पूर्णतः चर्चा के दौरान साँझा की गई जानकारी पर आधारित हैं I



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